राज्य व्यवस्थापिका, कार्यपालिका एवम् न्यायपालिका
(State ligislature , Executive and judiciary )
हमारे संविधान में देश के शासन प्रशासन के संचालन हेतु
सरकार की त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था है -
- विधानमंडल - कानून बनाने की शक्ति निहित है
- कार्यपालिका - शासन संचालन की शक्ति निहित है
- न्यायपालिका - न्याय प्रदान करना
- विधायिका -legislature
- संविधान के अनुच्छेद 168 के तहत राज्य की विधाई शक्ति राज्य विधानमंडल में निहित है
- प्रत्येक राज्य में एक विधानमंडल है। अधिकांश राज्यों में 1 सदस्य विधान मंडल है जबकि कुछ राज्यों में दिवसदनात्मक विधान मंडल है जिसे विधानपरिषद कहते है प्रथम सदन निम्न सदन और विधानसभा का द्वितीय सदन उच्च सदन जो कि विधान परिषद के नाम से संबोधित किया जाता है। प्रत्येक राज्य का विधान मंडल राज्यपाल तथा एक या दो सदनों मिलकर बनता है
- राजस्थान का विधान मंडल (केवल विधानसभा ) एक सदस्य है।देश के 7 राज्यों - जम्मू कश्मीर उत्तर प्रदेश बिहार कर्नाटक महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के विधानमंडल दिवसदनतामक ( विधानसभा एवं अन्य परिषद) है
विधानसभा - legislative Assembly
- प्रत्येक राज्य के विधान मंडल में एक या दो सदन हो सकते हैं केवल एक सदन होने पर वह विधानसभा एवं दो सदन होने पर एक विधानसभा जो निम्न सदन एवं दूसरा विधान परिषद जो उच्च सदन कहलाते हैं
- अनुच्छेद 169 के तहत संसद को शक्ति है कि वह किसी राज्य की विधान सभा द्वारा विशेष बहुमत से इस आशय का प्रस्ताव पारित करने पर उस राज्य में विधान परिषद का गठन कर सकती है
- संविधान के अनुच्छेद 170 के अनुसार प्रत्येक राज्य की विधानसभा में न्यूनतम 60 और अधिकतम 500 सदस्य हो सकते हैं यह सदस्य राज्य के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से बहुमत के आधार पर निर्वाचित होते हैं
1भारतीय नागरिक हो। 2 कम से कम 25 वर्ष की आयु हो। 3 उन सब योग्यताओं से युक्त हो जो संसद विधि द्वारा निर्धारित करें। 4 किसी भी सरकार के लाभ के पद पर ना हो
4. विधानसभा का कार्यकाल: प्रथम अधिवेशन की तिथि से 5 वर्ष लेकिन राज्यपाल से पूर्व में भी विघटित कर सकता है जो कि अनुच्छेद एक सौ बहत्तर में स्पष्ट है
5. विधानसभा की कार्यवाही का संचालन विधानसभा अध्यक्ष स्पीकर के द्वारा किया जाता है
- 6. अध्यक्ष विधानसभाभंग होने के साथ ही अपना पद रिक्त नहीं करता अपितु नई विधान सभा द्वारा नया अध्यक्ष चुन लिए जाने तक अपने पद पर आसीन रहता हे
कार्यपालिका executive
कार्यकारिणी (अंग्रेज़ी: Executive) सरकार का वह अंग होती हैं जो राज्य के शासन का अधिकार रखती हैं और उसकी ज़िम्मेदारी उठाती हैं। कार्यकारिणी क़ानून को कार्यान्वित करती हैं और उसे लागू करती हैं।
अध्यक्षीय प्रणाली में, कार्यकारिणी का प्रमुख दोनों, राज्य का प्रमुख और सरकार का प्रमुख होता हैं। संसदीय प्रणाली में, एक कैबिनेट मंत्री जो विधायिका को उत्तरदायी होता हैं, वह सरकार का प्रमुख होता हैं, जबकि राज्य का प्रमुख आम तौर पर एक औपचारिक राजा अथवा राष्ट्रपति होता हैं।
न्यायपालिका judiciary
उच्च न्यायालय -
- संविधान के अनुच्छेद 214के तहत प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय के गठन की व्यवस्था की गई है उच्च न्यायालय किसी राज्य की सर्वोच्च न्यायिक सत्ता होती है राज्य के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य नियुक्ति की सलाह पर की जाती है प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था अनुच्छेद 214 परंतु दो या अधिक राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था भी की जा सकती है
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की योग्यताएं 1 भारत का नागरििक हो 2कम से कम 10 वर्षों तक न्यायिक पद पर कार्य करने अथवा कम से कम लगातार 10 वर्षों तक उच्च न्यायालय में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव हो
- कार्यकाल. उच्च न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बना रह सकता है अनुच्छेद 217
- सेवानिवृत्ति के बाद किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय को छोड़कर उस उच्च न्यायालय में या अधीनस्थ न्यायालय में वकालत नहीं कर सकते एवं नई सरकार के अधीन कोई लाभ का पद ग्रहण कर सकते जो कि अनुच्छेद 220 में स्पष्ट है इनके वेतन वेतन एवं परिणाम संविधान में वर्णित है जिनमें संसद समय-समय पर संशोधन कर सकती है
- राजस्थान में न्यायिक व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर राजस्थान उच्च न्यायालय है जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत 29 अगस्त 1949 को जयपुर में की गई थी 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के बाद गठित सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर 1958 में उच्च न्यायालय जोधपुर हस्तांतरित कर दिया गया इसके तहत खंडपीठ 31 जनवरी 1977 को जयपुर में स्थापित की गई

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