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हिंदी तू हिंद का अभिमान || hindi tu hind ka abhiman | hindi bhasa par kavita | हिंदी भाषा पर कविता

हिंदी भाषा पर कविता , हिंदी तू हिंद का अभिमान,



हिंद का अभिमान

भारत भू पर होता है तेरा ही गुणगान तूझसे ही प्रेमचंद का गबन और गोदान देवनागरी में होता है तेरा ही बखान हिंदी तू ही है हिंद का अभिमान तुझसे ही है हमारा मान और समान हिंदी में ही लिया है हमने गणित और विज्ञान का ज्ञान

क्या करू में तेरे बखान

तुझसे ही हुआ है मेरे शब्दों का निर्माण ।।

जिसके बोल सुनकर कानो ने सौभाग्य पाया मुख को तेरे बोल बोलकर आनंद आया हृदय मेरा भी प्रफुल्लित हो आया जब मेने पढ़ी जयशंकर की छाया यह सब है हिंदी की माया और हिंदी से आया ॥

कवि
जयदीप  (जीत) 

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