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मेरी मां mothers day special कविता

Education adda with jaideep Kumar


मेरी मां






जिसने कभी कुछ ना चाह उसकी चाहत हूं में जिसने सींचा अपने लहू से वह मां ही है

वह अंकुरित बीज हूं में एक परी जो भेजी है खुदा ने

जिसे मां कहता हूँ में

जिसका मूल्य नहीं जग में

मां तेरा स्नेह है शांत हवा सा हमेशा बहता है हवा के संग जिसके प्रेम का कोई अंत नहीं वह है मेरी मां

तेरी सख्त आंखों ने

प्रेम दिया मुझे

तेरी बाहों ने गले लगाया मुझे

सबक दिया मुझे तेरे कोमल हृदय ने तेरे शब्दो से मिली है सीख मुझे मेरे लड़खड़ाते कदमों को संभाला है जिसने

मेरी मां ने पाला है मुझे




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