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राजस्थान जिला दर्शन
जोधपुर जिला
जोधपुर जिले का परिचय -
राव जोधा ने 12 मई 1459 ईस्वी में जोधपुर की स्थापना की थी । मंडोर जोधपुर की स्थापना से पहले मारवाड़ की राजधानी बनाई
राव जोधा ने मंडोर को सामरिक दृष्टि से सुरक्षित ना समझ कर चिडियाटुक की पहाड़ी पर जेष्ठ शुक्ल एकादशी, मई 12, 1459 शनिवार को मेहरानगढ़ नामक जिले कि स्थापना के साथ जोधपुर की स्थापना की थी
16वी शताब्दी इसका काफी विस्तार राव मालदेव के समय में हुआ था। जोधपुर का सबसे प्रतापी साशक भी राव मालदेव ही था।
1818 इस्वी इस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि चार्ल्स मेटकोफ मानसिंह राठौर के प्रयासों से कि गई थी
राजस्थान के एकीकरण के चोथे चरण में जोधपुर को राजस्थान में शामिल किया गया ( राजस्थान एकीकरण का चोथा चरण 30 मार्च 1949 को हुआ जिसका नाम v)
जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा नगर है इसे सूर्य नगरी, नीला शहर भी कहते है । अपनी सांस्कृतिक धरोहर के लिए विश्वविख्यात है । यहां के महल और किले इसकी सुंदरता को चार चांद लगाते हैं।
राजस्थान में जोधपुर ज़िले की स्थिति |
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राज्य - राजस्थान भारतसंभाग क्षेत्र। - जोधपुरजिला मुख्यालय। - जोधपुरक्षेत्रफल - 22852 km²जनसंख्या - 3687165जनसंख्या घनत्व। - 161Km²शहरी जनसंख्या। - 34.30%साक्षरतादर। - 65.94लिंगानुपात - 916
जोधपुर के उपनाम-
मारवाड़
मरुधर
थार प्रदेश का प्रवेश द्वार
राजस्थान की ब्लू सिटी
मरू कांतर परदेस
नीला शहर
मारवाड़
जोधपुर में राजस्थान की प्रमुख खंडपीठ है।अभी राजस्थान हाई कोर्ट की नई शानदार बिल्डिंग हाउसिंग बोर्ड शहर के बाहरी क्षेत्र में बन गई है।
जिसका मुखिया महामहिम राष्ट्रपति महोदय है माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा इसका उद्घाटन किया गया।
जोधपुर को राजस्थान की न्यायिक राजधानी भी कहा जाता है।
जोधपुर की तहसील -
1 बालेसर तहसील
2शेरगढ़ तहसील
3ओसिया तहसील
4 फलोदी तहसील
5 लूणी तहसील
6 बिलाड़ा तहसील
7 पीपाड़ सिटी तहसील
8 झवर उपतहसील
9तिवारी उपतहसील
प्रमुख दर्शनीय स्थल -
1 मेहरान गढ़ दुर्ग
2जसवंत थडा ( राजस्थान का ताजमहल)
3 उम्म्मेद भवन पैलेस
4 घंटाघर जोधपुर
5 मंडोर गार्डन
6मंडोर की छतरियां
7 उम्मेद उद्यान
9 सचिया माता मंदिर
10 मचिया बायोलॉजिकल पार्क
11 कायलाना झील
12 गणेश मंदिर
शिक्षा के केंद्र
1 जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर
2 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लॉ कॉलेज जोधपुर
3 Dr SN medical college जोधपुर
4 MBM engineering college jodhpur
5 आईआईटी जोधपुर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
6 आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स जोधपुर
मेहरानगढ़ का किला
राव जोधा ने मेहरानगढ़ दुर्ग की स्थापना 1459 ईस्वी में की थी। यह किला चिड़िया टुक पहाड़ी पर स्थित है।इस किले में 3 तोप रखी हुई है इसके अपना मुंह में से कुछ इस तरह से है। दुर्ग की नीव करनी माता ने रखी थी ।
सूर्यगढ़ चिड़िया टू का किला,मयूर ध्वज गढ़ चिंतामणि कालमुुखी,
दुर्ग के दर्शनीय स्थल - चामुंडा माता मंदिर, सुरी मस्जिद भूरे खान की दरगाह मनप्रकाश कीरत शिंह की छतरी
यहां का शाही पुस्तकालय 'पुस्तक प्रकाश भवन' के नाम से जाना जाता है। इस दुर्ग को जैकलीन कड़ेलीन ने विश्व का आठवा अजूबा कहा था।
इस दुर्ग के संग्रहालय में अकबर की तलवार रखी हुई है। दुर्ग में फूल में मोती महल नाम के दो बड़े महल भी है
मंडोर का किला
जोधपुर मंडोर मांडवे ऋषि की तपोभूमि थी। मंडोर का प्राचीन नाम मांडवपुर था।मंडोर मारवाड़ नर्सों की पूर्व राजधानी थी
अन्य स्थल
उम्मेद भवन (छितर भवन)
अकाल राहत कार्यों के लिए उम्मेद सिंह ने 1927 से लेकर 1940 के मध्य उम्मेद भवन का निर्माण करवाया इस महल का निर्माण छीतर पत्थरों से किया गया। इसे छीतर पैलेस भी कहते है।
विश्व के भव्य प्रसाधनों में उमेद पैलेस का नाम शीर्ष पर है।
जसवंत थडा
मारवाड़ के सांसद जसवंत सिंह द्वितीय की स्मृति में उनके उत्तराधिकारी सरदार सिंह के द्वारा जसवंत ठाडा जोधपुर का निर्माण करवाया गया इसका निर्माण 1906 में शाही सफेद संगमरमर से किया गया। इससे राजस्थान का ताजमहल भी कहते है।
∆ चोखा महल
∆बुलानी महल -इसेेेे वर्तमान अस्पताल केेेेेे नाम से संचालित किया जा रहा है
∆थंबा महल- इसे प्रहरी मीनार भी कहते इसका निर्माण अजीत सिंह ने किया था है
∆राई का बाग पैलेस
∆अन्य स्थापत्य व दर्शनीय स्थल
∆रानी सूर्य कंवर की छतरी – यह 32 खम्भों की छतरी है।
∆पंचकुंड की छतरियां – यहां पर राठौड़ों की छतरियां है और पुरानी गंगा राव की छतरी है
■मण्डोर की छतरियाँ राठौर राजाओं की छतरियां पंचकुंड में है प्रमुख छतरियाँ-कागा की छतरी, गौरा धाय की छतरी।
∆छतरियाँ—यहाँ की प्रमुख छतरियाँ-अखैराज, जैसलमेर रानी, अहाड़ा हिंगोला की छतरी।
∆कीरत सिंह की छतरी—मेहरानगढ़ (जोधपुर)में स्थित है
∆पुष्य हवेली—पुष्य नक्षत्र में बनी विश्व की एकमात्र हवेली
∆जोधपुर की अन्य हवेलियाँ—, पाल हवेली, राखी हवेली, पोकरण हवेली, पच्चिसां हवेली, आसोप हवेली, सांगीदास धानवी की हवेली (फलौदी), लालचन्द ढड़्डा की हवेली (फलौदी), मोती लाल अमरचन्द कोचर हवेली, फूलचन्द गोलछा हवेली (फलौदी)।बड़े मिंया की हवेली
∆प्रधानमंत्री राजसिंह चम्पावत की छतरी – जोधपुर के महाराजा जसवंतसिंह ने अपने प्रधानमंत्री राजसिंह चम्पावत की याद में 18 खम्भों की यह छतरी बनवाई थी।
∆मंडोर – यहां रावण ने मंदोदरी से विवाह किया ।यहाँ रावण की चंवरी/फेरे का मंडप है
∆प्रमुख धार्मिक स्थल∆∆
∆सच्चियाँ माता का मंदिर, ओसियां –
➯ओसिया (जोधपुर) में स्थित सच्चियाँ माता के इस मंदिर में माता की पूजा हिंदुओं और ओसवालों द्वारा समान रूप से की जाती है।
➯सचियां माता का मंदिर महिषमर्दिनी की सजीव प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।
∆अधरशिला रामदेव मंदिर –
➯यह मंदिर जालोरिया का बास, जोधपुर में एक सीधी चट्टान पर स्थित है। यह मंदिर बाबा रामदेव का मंदिर है।
∆महामंदिर, जोधपुर –
➯∆जोधपुर का यह महामंदिर नाथ सम्प्रदाय का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
➯∆ इसका निर्माण 1812 ईसवी में जोधपुर नरेश महाराजा मानसिंह द्वारा करवाया गया था।
➯∆यह मंदिर 84 खंभों पर निर्मित है। इसलिए यह पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही आकर्षक मंदिर है।
■संबोधीधाम, जोधपुर –
कायलाना झील के पास जोधपुर में स्थित इस धाम का निर्माण जैन धर्मावलंबियों द्वारा करवाया गया था।
∆∆∆जोधपुर के प्रमुख लोक देवी-देवता∆∆∆
∆सचियां माता –
➯∆यह ओसवालों की कुलदेवी है।
➯∆इन्हें सांप्रदायिक सद्भाव की देवी भी कहा जाता है।
➯इनके मंदिर का निर्माण प्रतिहार शैली में परमार राजकुमार उपलदेव ने 11 वीं शताब्दी में ओसियां (जोधपुर) में करवाया था।
∆आई माता –
➯ इनका जन्म अंबापुर (गुजरात) में हुआ था। इनके बचपन का नाम जीजाबाई था।
➯यह सीरवी जाति के क्षत्रियों की कुलदेवी हैं।
➯इनका प्रसिद्ध मंदिर बिलाड़ा (जोधपुर) में है।
➯∆आई माता के मंदिर को दरगाह भी कहा जाता है तथा इनके थान को बड़ेर कहते हैं।
➯∆इनके मंदिर में मूर्ति नहीं है। इनके मंदिर में जलने वाले दीपक की ज्योति से केसर टपकती है।
■नागणेची माता –
➯∆नागणेची माता राठौड़ वंश की कुलदेवी है।
➯इनका प्रमुख मंदिर मंडोर (जोधपुर) में है।
➯यह 18 भुजाधारी देवी है।
∆लुटियाला/लटियाला माता –
➯यह कल्लों की कुलदेवी हैं।
➯इनका प्रमुख मंदिर फलोदी (जोधपुर) में है।
➯∆इस मंदिर के आगे खेजड़ी वृक्ष स्थित है। इसलिए इन्हें ‘खेजड़ बेरी रेाय भवानी’ भी कहा जाता है।
∆चामुंडा माता –
➯∆मारवाड़ के राठोड़ों की इष्ट देवी हैं।
➯∆इनका मंदिर मेहरानगढ़ (जोधपुर) में है।
∆मांगलिया मेहाजी – यह कामड़िया पंथ से दीक्षित थे। इनका मुख्य मंदिर बापनी (जोधपुर) में है। जहां पर प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मेला भरता है। इनका घोडा ‘किरड़ काबरा’ है।
∆तल्लीनाथजी –
➯इनका जन्म शेरगढ़ (जोधपुर) में हुआ था।
➯∆वास्तविक नाम गांगदेव राठौड़ था।
➯∆इनके भाई – रावचूड़ा, पिता – वीरमदेव, गुरु – जालंधर नाथ थे।
➯तल्लीनाथजी जालोर क्षेत्र के लोकदेवता है। इनका जालोर के पांचोटा गांव में पंचमुखी पहाड़ी पर पूजा स्थल है।
∆रुपनाथजी –
➯ये पाबूजी के भतीजे थे।
➯इनका जन्म जोधपुर के कोलू गांव हुआ था।
➯💟 इनकी हिमाचल प्रदेश में बालकनाथकी के रूप में पूजा की जाती है।
➯कोलुमण्ड (जोधपुर) में इनका प्रमुख थान है।
■◆जोधपुर के प्रमुख सम्प्रदाय ◆■
■रामस्नेही संप्रदाय की खेड़ापा शाखा – रामस्नेही संप्रदाय की खेड़ापा शाखा के स्था पक रामदास जी थे।
■तेरापंथी संप्रदाय अर्ग– जैन श्वेतांबर के तेरापंथी संप्रदाय के संस्थापक आचार्य भिक्षु स्वामी थे। जिनका जन्म कंटालिया गांव (जोधपुर) में हुआ था।
■माननाथी संप्रदाय –
➯इसके प्रवर्तक नाथमुनि थे।
➯इसके प्रधान पीठ महामंदिर (जोधपुर) में हैं।
➯💟नाथपंथ के प्रथम गुरु गोरखनाथ थे।
■◆जोधपुर जिले के प्रमुख मेले और त्यौहार◆■
■नाग पंचमी का मेला – यह हुआ मेला मंडोर (जोधपुर) में भादवा सुदी पंचम को भरता है।
■💟धींगागवर बेतमार मेला – यह मेला जोधपुर में वैशाख कृष्ण तृतीया को भरता है।
■वीरपुरी का मेला – यह मेला मंडोर (जोधपुर) में श्रावण मास के अंतिम सोमवार को भरता है।
■बाबा रामदेव जी का मेला – बाबा रामदेव जी का का यह मेला मसूरिया (जोधपुर) में भादवा सुदी दूज को भरता है।
■फलौदी मेला – यह मेला फलोदी (जोधपुर) में माघ सुदी नवमी को भरता है।
■कापरड़ा पशु मेला – यह मेला करपदापरड़ा (जोधपुर) में पौष सुदी 8 से 13 तक भरता है।
■💟खेजड़ी वृक्ष मेला – यह मेला जोधपुर के खेजड़ली में भादवा शुक्ला दशमी को आयोजित होता है।
■पाबूजी का मेला – कोलू गांव (फलोदी, जोधपुर) में चैत्र अमावस्या को भरता है।
■💟चामुंडा माता का मेला – इनके मंदिर में आश्विन शुक्ल नवमी को जोधपुर दुर्ग में एक प्रसिद्ध मेला लगता है।
■◆ नदिया एवं जलाशय◆■
■जोधपुर में बहने वाली नदियाँ—लूनी, जोजरी, मीठड़ी।
■◆जोधपुर में मीठे पानी की झीलें ◆■
■कायलाना झील (जोधपुर) –
➯यह झील जोधपुर से लगभग 8 किलोमीटर पूर्व में है।
➯यह झील शुरू में एक प्राकृतिक झील थी। इसको वर्तमान स्वरूप सर प्रताप सिंह ने 1872 में दिया था।
➯जोधपुर की सबसे बड़ी झील, यह प्राकृतिक झील है। राज्य की एकमात्र झील जिसमें इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना का पानी ‘राजीव गाँधी लिफ्ट केनाल’ द्वारा डाला जाता है।
➯इसे प्रतापसागर झील भी कहते है (सरप्रताप ने इसका आधुनिकीकरण करवाया) जोधपुर शहर को जल की आपूर्ति इसी झील से होती है
➯💟इस झील से जोधपुर शहर को जलापूर्ति की जाती है।
➯माचिया सफारी पार्क भी कायलाना झील के किनारे स्थित है।
■बाल समंद झील (जोधपुर) –
➯यह झील जोधपुर-मंडोर मार्ग पर जोधपुर में स्थित हैं। इसका निर्माण 1159 ईस्वी में परिहार शासक राव बाउक (बालक राव प्रतिहार) ने करवाया था।
➯इस झील के बीच में महाराजा सुरसिंह ने अष्ट खम्भा महल का निर्माण करवाया था।
■इंडोलाई का तालाब जोधपुर जिले में स्थित है, जहां डोलोमाइट पाया जाता है। यही पर कागा की छतरियां है।
■जसवन्त सागर बाँध—जोधपुर जिले का सबसे बड़ा बाँध। 2007 में टूट गया था।
■उम्मेद सागर बाँध, पिचियाक बाँध, प्रतापसागर बाँध आदि भी जोधपुर में स्थित है।
■सरदार समंद झील – इस झील का निर्माण महाराजा उम्मेदसिंह द्वारा जोधपुर जिले में करवाया गया।
■फलौदी-खारे पानी की झील।
■अरना-झरना – जोधपुर में स्थित यह एक प्राकृतिक जलप्रपात है।
■जोधपुर के अन्य पर्यटन स्थान –
बिजोलाई के महल, फतेह महल, मोतीमहल, तख्तविलास, दौलतखाना तलहटी महल, फूलमहल, राइका बैग पैलेस, सूरसागर महल, इन्द्रराज सिंधी की छतरी, मामा-भांजा की छतरी, कागा की छतरी, गोरा धाय की छतरी आदि।
■ वन्य जीव व अभ्यारण्य
■◆जोधपुर के प्रमुख जंतुआलय/मृगवन ◆■
■माचिया सफारी मृगवन –
➯इसकी स्थापना 1985 में की गयी। यह मृगवन जोधपुर से 5 किलोमीटर दूर कायलाना झील के पास ही स्थापित है।
➯इस पार्क में माचिया दुर्ग स्थित है।
➯💟यहां पर राज्य एवं देश का प्रथम ‘राष्ट्रीय मरु वानस्पतिक उद्यान’ बनाया गया है।
■अमृतादेवी कृष्ण मृगवन—खेजड़ली,
➯स्थापना-1994, यहाँ की मरु लोमड़ी भी प्रसिद्ध है।
➯खेजड़ली ग्राम (जोधपुर) में अमृता देवी विश्नोई ने खेजड़ी वृक्ष बचाने के लिए 363 लोगों के साथ 1730 ई. में अपने प्राण त्यागे।
➯विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला भाद्रपद शुक्ल दशमी को खेजड़ली ग्राम में लगता है, जबकि खेजड़ी दिवस 12 सितम्बर को मनाया जाता है।
➯राजस्थान में अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार की शुरुआत 1994 में हुई एवं प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता—गंगा विश्नाई।
■राज्य में जीवों की रक्षार्थ पहला बलिदान सन् 1604 में जोधपुर रियासत के रामसड़ी ग्राम में गौरा व कर्मा ने दिया।
■धावा डोली अभयारण (जोधपुर) में सर्वाधिक कृष्ण मृग पाये जाते है।
■जोधपुर जंतुआलय –
➯इसकी स्थापना 1936 में जोधपुर में की गयी।
➯यहां पर राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण का कृत्रिम प्रजनन केंद्र है।
■★कला व संस्कृति★■
■जोधपुर चित्र शैली – जोधपुर चित्रकला शैली की विशेषताएं – रेत के टीले, कौए, चिंकारा, ऊँट, घोड़े,छोटी-छोटी झाड़ियां आदि का चित्रण। इस शैली का स्वर्णकाल मालदेव के शासनकाल में था। यह शैली नाथ सम्प्रदाय से सम्बंधित है।
■ जोधपुर शैली के प्रमुख चित्रकार – देवदास, शिवदास, रामा, नाथा, छज्जू और सैफू आदि। जोधपुर लघु चित्रकला को हाथ से तैयार किया गया है। यह चित्रकला शैली ऊँट की पीठ पर ढोला और मरू जैसे प्रसिद्ध प्रेमियों के दृश्यों को दर्शाती है। मारवाड़ शैली में ‘रागमाला चित्रावली’ का चित्रांकन वीरजी ने 1623 ईस्वी में किया था।
■जोधपुर की प्रमुख हस्तकलाएं – बादला (जस्ते से निर्मित ठन्डे पानी के बर्तन), मोजड़ियां, साफा, हाथी दांत की चूड़ियां, बंधेज का कार्य, चमड़े के बटवे, मलमल का कार्य (मथानियाँ गांव में), मोठड़ा (लुगदी पर किया हुआ कार्य) आदि।
■◆जोधपुर की प्रमुख अकादमियां ◆■
■💟केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसन्धान – (CAZRI – Central Arid Zone Research Institute) जोधपुर जिले में है। इसकी स्थापना 1959 में जोधपुर में की गयी।
■💟शुष्क वन अनुसन्धान केंद्र – (AFRI – Arid Forest Research Institute ) इसकी स्थापना भी जोधपुर में 1985 में की गयी थी।
■💟राजस्थान संगीत नाटक अकादमी – इसकी स्थापना 1957 में जोधपुर में की गयी।
■💟रूपायन शोध संस्थान ( बोरून्दा ) – इसकी स्थापना 1960 में जोधपुर में की गयी। इसका कार्य राजस्थानी कला का संचय करना है।
■प्राविधिक शिक्षा निदेशालय – इसकी स्थापना 17 अगस्त, 1956 में जोधपुर में की गयी।
■राजस्थान प्राच्य विद्या संस्थान – इसकी स्थापना 1950-51 में जोधपुर में की गयी। यह राजस्थान का सबसे बड़ा पाण्डुलिपि भंडार ग्रह है।
■जोधपुर के अन्य सांस्कृतिक केंद्र एवं संस्थान –
राजस्थान ओरिएंटल अनुसन्धान संस्थान, सीमा सुरक्षा बल का फ्रंटियर मुख्यालय (जोधपुर में), मीरा बाई अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), राजस्थान उच्च न्यायालय, राजस्थान शोध संस्थान, राष्ट्रीय कला मंडल।
■◆जोधपुर जिले में प्रमुख विश्वविद्यालय◆■
■डॉ. एस. राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय – इसका निर्माण 2002 में करवड़ (जोधपुर) में किया गया।
➯💟 यह राजस्थान का प्रथम आयुर्वेद विश्वविद्यालय तथा भारत का दूसरा आयुर्वेद विश्वविद्यालय है।
➯💟 भारत का पहला आयुर्वेद विश्वविद्यालय जामनगर (गुजरात) में है।
■जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय –
➯जोधपुर में इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1962 की गयी। शुरुआत में इस विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र जोधपुर शहर तक ही था लेकिन बाद में सिरोही को छोड़कर पुरे जोधपुर संभाग तक कार्यक्षेत्र हो गया।
➯💟यह एक पूर्णत: आवासीय विश्व विद्यालय है।
■राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय –
➯इसकी स्थापना 2001-02 में जोधपुर में की गयी।
➯यह राजस्थान का प्रथम विधि विश्वविद्यालय है।
➯💟 इसके कुलाधिपति राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होते है।
■जोधपुर में अन्य प्रमुख विश्वविद्यालय –
सरदार पटेल पुलिस सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय विश्वविद्यालय, स्कुल ऑफ़ डेजर्ट साइंस, आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) का केंद्र, एनर्जी खनन और पेट्रोलियम विश्व विद्यालय, फुटवियर डिजाइन एवं डवलपमेंट इंस्टिट्यूट आदि प्रमुख विश्वविद्यालय हैं।
■★जोधपुर के प्रसिद्ध व्यक्तित्व ★■
■ज्योति स्वरूप शर्मा— इन्होंने रेणुका आर्ट्स हस्तशिल्प शोध संस्थान की स्थापना की।
■💟मुहणौत नैणसी— को ”राजपूताने का अबुल फजल”, जयपुर निवासी मुंशी देवी प्रसाद ने कहा। इन्होंने ”मुहणौत नैणसी री ख्यात” व ”मारवाड़ रा परगना री विगत” (राजस्थान का गजेटियर) की रचना की। मुहणौत नैणसी ने जालौर के शासक कीर्तिपाल को ”कित्तु एक महानराजा” की उपाधि दी थी।
■राव चन्द्रसेन— मारवाड़ का प्रताप, भूला-बिसरा राजा, ”मारवाड़ का विस्मृत नायक” आदि नामों से प्रसिद्ध है।
■💟मेजर शैतान सिंह— द्वितीय परमवीर चक्र विजेता (1962)।
■विजयदान देथा— बोरुन्दा, जोधपुर 1926 ई.। ग्रन्थ-बातां री फुलवारी 2007 में पद्म श्री से सम्मानित।
■सुमनेश जोशी— ‘रियासती’ दैनिक समाचार पत्र के सम्पादक। इसी अखबार ने 26 मई, 1948 को जोधपुर के राजा हनुवंत सिंह के पाकिस्तान में मिलने के इरादों का भण्डाफोड़ किया।
■लालसिंह भाटी— गैंडों की खाल से बनी ढ़ाल पर नक्काशी करने हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित।
■डॉ. सीताराम लालस— नरेना, इनकी रचना ”राजस्थानी भाषा का शब्दकोश” है इसमें 10 खण्ड है, एन्साइक्लोपेडिया ऑफ ब्रिटेनिका ने इन्हें ‘राजस्थानी जुबान की मशाल’ कहकर सम्बोधित किया।
■नारायण सिंह माणकलाव— राज्यसभा में मनोनीत प्रथम राजस्थानी।
■कैलाश सांखला— पर्यावरणविद् सांखला ‘टाइगर मैन’ के उपनाम से प्रसिद्ध।
गवरी देवी— मांड गायिका।
■◆जोधपुर के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य ◆■
■खेजड़ली, जोधपुर –
➯यह गांव वृक्ष प्रेम मेंें विश्व प्रसिद्ध
➯1730 मैं यहां पर अमृताा देवी एवं उनके साथियोंंं ने बलिदान ांदिया था इसगांव में शहीद स्मारक बना हुआ हैं।
■बिरला व्हाइट सीमेंट उद्योग –
➯भोपालगढ़ जोधपुर में स्थित है तथा यह राज्य का प्रथम सफेद सीमेंट कारखाना है
■जोधपुर की आकृति मयूराकार है।
■विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला खेजड़ली जोधपुर में है
■भारत की प्रथम लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर में है
■मारू वानस्पतिक उद्यान माचिया सफारी पार्क जोधपुर में है जो देश का प्रथम है
■भारत का पहला रेलवे मेडिकल कॉलेज जोधपुर में है
■अट्ठारह सौ 1940 ईसवी में राजस्थान का पहला सरकारी डाकघर जोधपुर में बनाया गया
■भारत का पहला ऑनलाइन जिला न्यायालय जोधपुर है
■💟ओसिया जोधपुर में राज्य का पहला स्पाइस पार्क स्थित है
मंडोर जोधपुर में राजस्थान में रावण का पहला मंदिर स्थित है
■राजस्थान की सर्वाधिक ऊन उत्पादन जोधपुर जिले में होता है
■जोधपुर जिला सर्वाधिक आखेट निषिद्ध वाला क्षेत्र है
■जोधपुर क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा संभाग है
■कमल कमल कांत वर्मा जो राजस्थान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रथम थे 29 August 1949 ko sawai mansingh ne Rajasthan mukhya nyayalay ki sthapna ki थी
■देश का दूसरा एम्स कॉलेज जोधपुर में है तथा पहला दिल्ली में
■कोट और पैंट को जोधपुर के पोशाक के रूप में मान्यता मिली है
■intelligence bureau jodhpur mein हैं
■जोधपुर जिले को सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने ही जिला घोषित किया
■पाल गांव जोधपुर में राज्य की फिल्म सिटी स्थित है
राजस्थान का पहला एयड्स उपचार केंद्र जयपुर में है तथा दूसरा जोधपुर में है
■मीरां बाई अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान—जोधपुर में है।
■अजीत भवन जो कि विश्व प्रसिद्ध हेरिटेज होटल है वह जोधपुर में है
■प्रवासी पक्षी कुरजा जोधपुर के खीचन क्षेत्र में शीतकालीन ऋतु में आता है
■भारत समन्वित बाजरा अनुसंधान संस्थान परियोजना का मुख्यालय-जोधपुर में है
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर में है
राज्य का प्रथम हज हाउस का लोकार्पण अप्रैल 2012 को जोधपुर में किया गया
■केन्द्रीय शुष्क भूमि क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI) —जोधपुर। (स्थापना 1959)
■शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) —जोधपुर में है
■मथानिया जोधपुर में नवीनतम सौर ऊर्जा संयंत्र है मथानिया की मिर्ची भी प्रसिद्ध है
■सामरिक दृष्टि से समृद्धि हवाई अड्डा रातानाडा जोधपुर है
■राज्य का पहला राजीव गाँधी टूरिज्म कन्वेंशन सेंटर-जोधपुर में प्रस्तावित है
■राजस्थान का सर्वाधिक शुष्क स्थान फलोदी जोधपुर है
■पश्चिमी राजस्थान की कांशी जोधपुर जिले की तहसील फलोदी है
■दशहरा शोक पर्व—मण्डोर (जोधपुर) में मनाया जाता है।
■ नाथ सम्प्रदाय —मान सिंह राठौड़ ने महामंदिर जोधपुर का निर्माण करवाया था जो कि नाथ संप्रदाय की प्रधान पीठ है
■मोठरा लहरिया जोधपुर का प्रसिद्ध है
■जोधपुर जिले में इसबगोल अनुसंधान केंद्र है
■जोधपुर संभाग के प्रमुख जिले – जैसलमेर, बाड़मेर, जालोर, सिरोही तथा पाली जिले है।
■जोधपुर के प्रमुख बांध एवं बावड़ियां – रतन बावड़ी ओसियां उमेद सागर औरत सागर, तापी बावड़ी, महिला बाग का झालरा यहां लोटिया का मेला लगता है
■लालमिर्च के लिए जोधपुर का मथानियां की प्रसिद्ध है
बदामी रंग के पत्थरों के लिए जोधपुर प्रसिद्ध है
■मारवाड़ महोत्स्व – शरद पूर्णिमा (सितंबर से अक्टूबर) में जोधपुर में आयोजित होता है।
■ मारवाड़ी भेड़ वंश
अनुसन्धान केंद्र जोधपुर जिले में है।
■गोमठ ऊँट वंश – फलोदी जोधपुर में पाई जाने वाली सवारी हेतु उपयुक्त ऊंट की प्रमुख नस्ल
भीम साईं विजय साईं अखे साईं आदि यहां के प्रमुख के थे
■💟मारवाड़ किसान आंदोलन – पशुओं के निष्कासन पर चांद मन सुराणा वेदव्यास का एक संगठित आंदोलन
मारवाड़ प्रजामण्डल – जैन एंड व्यास ने 1934 में मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना की थी और इसके अध्यक्ष के रूप में भंवरलाल सराफा को चुना गया
मारवाड़ लोक परिषद – सुभाष चन्द्र बोस ने 1938 ईस्वी में गठन किया। जयनारायण व्यास ने तत्पश्चात इसका नेतृत्व किया। महाराजा का उद्देश्य था कि इसमें उत्तरदाई शासन की स्थापना की जाए
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