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राजस्थान के किसान आंदोलन

 प्रमुख किसान आंदोलन राजस्थान



राजस्थान के इतिहास में कई किसान आंदोलन हुए जिनमें से कुछ की चर्चा हम करेंगे 


बिजौलिया किसान आंदोलन -
                (1897-1941)।        मेवाड़ रियासत में बिजौलिया किसान आंदोलन हुआ था यह किसान आंदोलन सर्वाधिक चलने वाला किसान आंदोलन था ।
इसे धाकड़ जाति को किसान आंदोलन भी कहते है 

सर्वप्रथम इसका नेतृत्व साधु सीता राम दास ने 1897इस्वी में किया था 
चवरी कर 1903 ईसवी में कृष्ण शिंह ने लगाया 5 रू का यह कर किसानों को कन्या के विवाह से संबंधित था।
1906 ईसवी में कृष्ण सिंह की मर्त्यू के उपरान्त प्रथ्वी सिंह ने राज्याभिषेक संबधी तलवार कर लगाया।

किसानों ने अपनी कन्याओ का विवाह रोक के आंदोलन को और तेज किया था 1915 ईसवी में इसका नेतृत्व विजय सिह पंथिक ने किया  पथिक का वास्तविक नाम भूप सिंह गुर्जर था। साधु सीता राम दास और रामनारायण चौधरी के आग्रह पर पंथिंक ने बिजौलिया के किसान आंदोलन नेतृत्व संभाला। कानपुर से प्रकाशित पत्रिका 'प्रताप' नामक समाचार पत्र के 
माध्यम से नेतृत्व संभाला। 
 इस आंदोलन में गांधी जी जैसे नेता ने भी भाग लिया था ।इसके परिणाम स्वरूप किसानों के 84 में से 35 करो को समाप्त करने का आश्वासन दिया गया ।परंतु 1922 तक इसकी क्रियान्वित नहीं किया गया तब यहां के किसानों ने आंदोलन पुनः शुरू किया गया।

आंदोलन के अंत  मानिक्यालाल वर्मा, जमनालाल  और हरिभाऊ उपाध्याय बिजौलिया के किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था ।
बेंगु किसान आंदोलन  ( चितौड़गढ़)
1921-1923

बेंगू किसान आंदोलन जोकि बिजोलिया किसान आंदोलन से प्रभावित होकर चौधरी राम नारायण के नेतृत्व मे 1921 को  हुआ इसकी इसकी शुरुआत लागबाग और बेगार प्रथा के विरोध में हुई
बेगू में किसान सभा का आयोजन रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में हुआ। वहां के जमींदार ने बैंकों में हो रही सभा पर फायरिंग करवा दी जिसमें रूपा जी और करता जी नामक 2 किसान मारे गए। इसके बाद आंदोलन मैं बहुत थी तेजी बढ़ती गई। शुरुआती दौर में इसका नेतृत्व रामनारायण चौधरी ने किया था उसके बाद इसका नेतृत्व विजय सिंह पथिक ने संभाला था
वहां के ठाकुर अनूप सिंह ने सब मांगों को मान लिया और उनको किसानों के सामने झुकना पड़ा। अंग्रेजों ने अनूपसिंह को नजरबंद कर दिया । ट्रेच आयोग का  गठन आंदोलन की जांच के लिए किया गया ।

मारवाड़ में किसान आन्दोलन
मारवाड़ के किसानों पर बहुत ही अधिक बहुत ही अधिक अत्याचार  होने लगेजयनारायण व्यास ने मारवाड़ कारिणी सभा का गठन 1923ई में किया  और किसानों को आंदोलन करने के प्रति प्रेरित करने लगा परंतु सरकार ने मारा निस्तारिणी सभा को गैरकानूनी घोषित करके बंद कर दिया
मारवाड़ किसान हित सभा का गठन सरकार ने किसानों को देखते हुए किया, परन्तु उसे सफलता प्राप्त नहीं हुई। अब सरकार ने आंदोलन का दमन करने की नीति अपनाई परंतु इसमें वह कामयाब नहीं हुए
चण्डावल तथा निमाज नामक गाँवों के किसानों पर  अत्याचार किये गये तथा डाबरा में अनेक किसानों को निर्दय  पूर्वक मार दिया गया। 
आजाद भारत में भी जागीरदार काफी समय तक किसानों पर अत्याचार करते रहे किन्तु राज्य  में लोकप्रिय सरकार के गठन के बाद किसानों को आखिरकार खातेदारी के अधिकार मिल गये।
बूंदी किसान आंदोलन (1926):-
बरड़ किसान आंदोलन बूंदी किसान आंदोलन का इनाम है। इस आंदोलन का मुख्य कारण अत्यधिक लागबाग अत्यधिक लगान और बेगार थी।
नैनू राम शर्मा ने इस आंदोलन की शुरुआत की थी । डाबी नामक किसानों ने इनके नेतृत्व में एक सम्मेलन बुलाया पुलिस ने किसानों पर गोलिया चलाई, जिसमें नानक जी भील झंडा गीत गाते हुए शहीद हो गई
पूर्व में इसका नेतृत्व नैनू राम शर्मा ने किया बाद में इसका नेतृत्व माणिक्य लाल वर्मा ने किया। यह आंदोलन 17 वर्ष तक चला और 1943 ईस्वी में यह आंदोलन समाप्ति की ओर गया।

अन्य किसान आंदोलन-
1 मातृकुंडिया किसान आंदोलन चितौड़गढ़
इसकी शुरूआत 22 जून 1888 में हुई यह एक जाट आंदोलन था। इस समय यहां के। शासक महाराणा फतेह  सिंह थे

2 भोमट किसान आंदोलन -
भोमट किसान आंदोलन 1918 में शुरू हुआ मोतीलाल तेजावत ने भील आंदोलन का नेतृत्व किया था । गोविन्द गिरी ने भीलो में एकता स्थापित करने का प्रयास किया था 
दुधवा खारा  किसान आंदोलन 
1946-47
ये आंदोलन बीकानेर रियासत के चूरू में हुआ था ।जमींदारों का अत्याचार इसका मुख्य कारण था ।इसका नेतृत्व रघुवर्दयाल गोयल ने किया था ।

शेखावाटी किसान आंदोलन 
1925
यह आंदोलन कटराथल पलथाला गोधरा कुंदंगाव आदि में फैला था । इसमें मुख्य रूप से जयपुर प्रजामंडल  का योगदान था । खुडी गांव में यहा किसान मारे गए थे। 1946 में हीरालाल शास्त्री ने समाप्त किया था ।


मेव किसान आन्दोलन। -1931
यह अलवर भरतपुर में हुआ था । अलवर भरतपुर बाहुल्य क्षेत्र को मेवात  कहते है।
यह लगान के विरोध में आंदोलन हुआ था।  आंदोलन का नेतृत्व मोहमंद अली ने किया था। 


जयसिंह पूरा किसान हत्याकांड - 1934
इसमें डूडलो के किसानो पर गोलियां चलाई गई थी। इसमें कई किसान शहीद हुए थे। इस्वरीशिंह पर मुकदमा हुआ था 

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