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बाड़मेर जिला दर्शन

 

बाड़मेर का सामान्य परिचय

  • बाड़मेर को बारहड़देव ने 1246 ईसवी में बसाया था।
  •  बाड़मेर जिले के उपनाम/प्राचीन नाम : श्रीमाल, बाढ़ाणा,  मालानी, बाहड़मेढ़, शिव कूप, किरात कूप, कला एवं हस्तशिल्प का सिरमौर।
  • बाड़मेर जिले का क्षेत्रफल कितना है : 28387 वर्ग किलोमीटर।
  •  बाड़मेर की अक्षांशीय स्थिति : 24 डिग्री 4 मिनट उत्तरी अक्षांश से 26 डिग्री 32 मिनट उत्तरी अक्षांश तक।
  •  बाड़मेर की देशांतरीय स्थिति : 70 डिग्री 5 मिनट पूर्वी देशांतर से 72 डिग्री 52 मिनट पूर्वी देशांतर तक।

बाड़मेर जिले के प्रमुख मेले एवं त्यौहार

 आलम जी का मेला : यह मेला बाड़मेर के धोरीमना क्षेत्र में भादवा सुदी द्वितीया को भरता है।
 सावन का मेला : यह मेला सिवाना में श्रावण कृष्ण 2-3 को भरता है।
  हल्देश्वर महादेव शिवरात्रि मेला : यह मेला पीपलोद बाड़मेर में शिवरात्रि के अवसर पर भरता है। पिपलोद बाड़मेर को मारवाड़ का लघु माउंट आबू कहा जाता है।
 जोगमाया का मेला : यह मेला बाड़मेर के चालकना  क्षेत्र में भादवा सुदी चतुर्दशी को भरता है।
 रणछोड़राय का मेला : यह मेला बाड़मेर के खेड़ में प्रतिवर्ष राधाष्टमी, माघ पूर्णिमा, वैशाख एवं श्रावण मास की पूर्णिमा एवं कार्तिक पूर्णिमा, भादवा सुदी चतुर्दशी को भरता है।
 बजरंग पशु मेला : यह मेला बाड़मेर के सिणधरी क्षेत्र में मगसर वदी तृतीया को भरता है।
 मल्लीनाथ पशु मेला : यह मेला बाड़मेर के तिलवाड़ा क्षेत्र में क्षेत्र कृष्णा 11 से शुक्ला 11 तक भरता है।
 सुइयों का मेला : यह मेला बाड़मेर के चौहटन क्षेत्र में हर 4 वर्ष में माह की अमावस्या को भरता है। इसे अर्धकुंभ के नाम से भी जाना जाता है।
 रानी भटियानी का मेला : यह मेला बाड़मेर के बालोतरा के निकट जसोल में कार्तिक वदी पंचमी को भरता है।
 विरात्रा माता का मेला : यह मेला बाड़मेर के विरात्रा क्षेत्र में चेत्र, भाद्रपद एवं माघ माह में भरता है।
 नाकोड़ा जी का मेला : यह मेला नाकोड़ा तीर्थ मेवानगर बाड़मेर में पोष वदी दसमी एवं ग्यारस को भरता है।

बाड़मेर जिले के प्रमुख मंदिर

  • मल्लिनाथ जी का मंदिर (तिलवाड़ा, बाड़मेर)
  • किराडू के मंदिर (राजस्थान का खजुराहो)
  • ब्रह्मा का मंदिर (आसोतरा, बाड़मेर)
  • रणछोड़राय जी का खेड़ा मंदिर
  • आलम जी का मंदिर (धोरीमना क्षेत्र में)
  • श्री नाकोड़ा जी तीर्थ स्थल
  • विरात्रा माता का मंदिर
  • मां नागणेची का मंदिर
  • शिव मुंडी महादेव मंदिर
  • जसोल राणी भटियाणी माता का मंदिर आदि।

बाड़मेर के पर्यटन स्थल

उपरोक्त वर्णित प्रसिद्ध दर्शनीय मंदिरों के अलावा बाड़मेर के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण निम्न प्रकार है :-
  • बाटाडू का कुआ (रेगिस्तान का जलमहल)
  • सिवाना दुर्ग (मारवाड़ के शासकों की शरण स्थली)
  • राष्ट्रीय मरू उद्यान (4 अगस्त 1980 को वन्य जीव अभयारण्य घोषित)

बाड़मेर जिले के जल स्रोत/नदियां/जल परियोजनाएं

 लूनी नदी : लूनी नदी मुख्यतः मोसमी नदी है। लूनी नदी का पानी बाड़मेर के बालोतरा क्षेत्र से पहले मीठा होता है उसके बाद में खारा हो जाता है।
 पचपदरा झील : पचपदरा झील से प्राप्त नमक का सर्वश्रेष्ठ क्वालिटी का नमक होता है। इसमें 98% सोडियम क्लोराइड होता है। यहां पर खारवाल जाति के लोगों द्वारा मोरली झाड़ी पद्धति द्वारा नमक के स्फटिक बनाए जाते हैं।
 नर्मदा नहर परियोजना : नर्मदा नहर जालौर के सीलू गांव से राजस्थान में प्रवेश करती है। इस सिंचाई परियोजना का प्रयोग जालौर एवं बाड़मेर के रेगिस्तान वाले भूभाग को सिंचित करना है।
 इंदिरा गांधी नहर : इसको राजस्थान की मरू गंगा एवं राज्य की जीवन रेखा कहा जाता है। इससे भी बाड़मेर को जलापूर्ति होती हैं।

बाड़मेर के ऊर्जा संसाधन

बाड़मेर में भरपूर मात्रा में उत्तम क्वालिटी का पेट्रोलियम निकलता है। यहां पर बहुत से तेल के कुए हैं।
  • बाड़मेर के तेल के कुए : रागेश्वरी, ऐश्वर्या, मंगला, सरस्वती, भाग्यम आदि।
  • पेट्रोल : मग्गा की ढाणी, चुनावाला, बोधिया गांव आदि।
  • बाड़मेर में रिफाइनरी : सितंबर 2013 में बाड़मेर के पचपदरा क्षेत्र में सोनिया गांधी द्वारा रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉन्प्लेक्स का शिलान्यास किया गया था जो वर्तमान में निर्माणाधीन है।

बाड़मेर जिले के तथ्य | Barmer GK Questions


  • पत्थर मार होली कहां की प्रसिद्ध है - बाड़मेर की 
  • बाड़मेर का कौनसा क्षेत्र गोंद उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है - चौहटन क्षेत्र 
  • देश की पहली औरन पंचायत कौन सी है - ढोंक गांव बाड़मेर।
  • राजस्थान में सर्वाधिक पंचायत समितियां वाला जिला कौन सा है - बाड़मेर (17 )
  • अजरक प्रिंट एवं मलिर प्रिंट किस जिले की प्रसिद्ध है - बाड़मेर की।
  • राजस्थान के किस जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान के साथ एवं अंतर्राज्यीय सीमा गुजरात के साथ लगती है - बाड़मेर जिले की।
  • बाड़मेर जिले की पाकिस्तान के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा की लंबाई कितनी है : 228 किलोमीटर।
  • राजस्थान का पहला लिग्नाइट पर आधारित बिजली घर कौन सा है - गिरल, बाड़मेर।
  • कोटड़ा का किला कहां स्थित है - बाड़मेर में।
  • बाड़मेर में पेयजल की समस्या के निराकरण के लिए कौन सी परियोजना चलाई जा रही है - सुजलाम परियोजना।
  • देश एवं राजस्थान की सर्वाधिक खारी झील कौन सी है - पचपदरा झील, बाड़मेर।
  • बाड़मेर जिले के किस क्षेत्र में संत पीपा का मंदिर स्थित है - समदड़ी क्षेत्र में।
  • खूबड़ माता का मंदिर एवं गरीबनाथ का मंदिर किस जिले में स्थित है - बाड़मेर में।
  • थार महोत्सव एवं बैलून महोत्सव किस जिले में आयोजित होता है - बाड़मेर जिले में अप्रैल माह में आयोजित होता है।
  • गडरा का शहीद स्मारक कहां स्थित है - गडरा रोड, बाड़मेर में।
  • राजस्थान में सर्वाधिक भेड़ किस जिले में पाई जाती है - बाड़मेर जिले में।
  • राजस्थान में सर्वाधिक बकरियां किस जिले में पाई जाती है - बाड़मेर जिले में।
  • राजस्थान में सर्वाधिक ऊंट किस जिले में पाए जाते हैं - बाड़मेर जिले में।
  • राजस्थान में सर्वाधिक घोड़े किस जिले में पाए जाते हैं - बाड़मेर जिले में।
  • राजस्थान में सर्वाधिक गधे किस जिले में पाए जाते हैं - बाड़मेर जिले में।

बाड़मेर जिला


बाड़मेर जिला
क्षेत्रफल :28,387 किमी²
जनसंख्या(2011):26.04 lakh
 • घनत्व :92/किमी²
उपविभागों की संख्या:17
मुख्य भाषा(एँ):हिन्दी, राजस्थानी

बाड़मेर ज़िला भारत के राजस्थान राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय बाड़मेर है। ज़िला मुख्यालय बाड़मेर के अलावा अन्य मुख्य कस्बे बालोतरा, गुड़ामलानी, बायतु, सिवाना, जसोल, चौहटन, धोरीमन्ना और उत्तरलाई हैं। बाड़मेर के पचपदरा में एक अत्याधुनिक रिफ़ाइनरी निर्माणाधीन है । ‌‌‍‍‌

प्रशासनिक इकाइयां

1. उप जिला: -गांव(no. of villages)

* बाड़मेर-211 , बायतु-317 , चौहटन-322 , गुड़ामालानी-362 , पचपदरा-231 , रामसर-125 , शिव-250 , सिवाना-115


बाड़मेर का इतिहास

बाडमेर की स्थापना 13वी शदी मे राव बाहड राव परमार ने की ओर उन्ही का नाम पर बाहडमेर नाम पडा । बाहड राव परमार जूना बाडमेर के शासक थे तथा जूना बाडमेर की पहाडी पर ही बाहड राव परमार ने एक छोटे से किले का निर्माण भी कराया जो जो जूना बाडमेर गढ नाम (13वीशदी)से जाना जाता था ।

जूना बाडमेर वर्तमान बाडमेर शहर से 25 km दूर स्थित है । परमारो के बाद जूना बाहडमेर पर चौहानो का अधिपत्य हुआ । उसके बाद रावत लूंका (रावल जगमाल के पुत्र व रावल मल्लीनाथ के पौत्र) ने अपने भाई रावल मंडलीक की सहायता से चौहान शासक (राव मुंधा जी) से बाडमेर जीता व जूना बाहडमेर में अपना राज्य स्थापित कर जूना को अपनी राजधानी बनाया ।

रावत भीम (कुशल शासक व योद्घा) ने 15से 16 ईस्वी के बीच अपनी राजधानी को जूना बाडमेर से स्थानान्तरित किया व वर्तमान बाडमेर शहर की स्थापना की व नया बाडमेर बसाया व पहाडी दुर्ग(गढ बाडमेर) का निर्माण कराया । पुराने बाडमेर जूना मे स्थित को जूना बाडमेर व नये बसाये बाडमेर का नया बाडमेर कहा जाने लगा ।

कालांतर मे नया शब्द धीरे धीरे हटता गया व बाडमेर शब्द प्रचलन मे आया ।

7 अप्रेल 1948 को भारत सरकार ने राजस्थान राज्य मे बाडमेर को नया जिला बनाया।

भूगोल

थार मरुस्थल का एक भाग बाड़मेर जिला, राजस्थान के पश्चिम में स्थित है। जिला उत्तर में जैसलमेर जिले, दक्षिण में जालौर जिले, पूर्व में पाली और जोधपुर जिले तथा पश्चिम में पाकिस्तान से घिरा है। जिले का कुल क्षेत्रफल 28387 वर्ग किमी है। जिला उत्तरी अक्षांश 24,58’ से 26, 32’ और पूर्वी देशान्तर 70, 05’ से 72, 52’ के मध्य स्थित है।

जिले में सबसे लंबी नदी लूणी नदी है। यह जालोर के मध्यम से गुजरकर कच्छ की खाड़ी के समीप की भूमि में ही सोख ली जाती है, और इसकी कुल लंबाई 480 किमी है। विभिन्न ऋतुओं में तापमान में बदलाव काफी अधिक है। गर्मियों में तापमान 51 डिग्री सेल्सियस तक और सर्दियों में यह शून्य डिग्री सेल्सियस (32° फैरनहाइट) तक चला जाता। एक साल में औसत वर्षा केवल 277 मिमी है, और मुख्य रूप से बाड़मेर जिला एक रेगिस्तान है। फिर भी, 16 और 25 अगस्त 2006 के बीच 549 मिमी की चरम वर्षा से आई बाढ़ की वजह से कई लोग मारे गए और भारी नुकसान हुआ।

मुख्य आकर्षण

-ब्रह्मा जी का मंदिर आसोतरा

ब्रह्मा जो हिंदुओं के भगवान है इनके दो रूप है विष्णु और महेश ये ब्रह्मा जी के अवतार है। ब्रह्मा जी का एक मन्दिर पुष्कर ,राजस्थान में स्थित है और दूसरा मन्दिर यह है जो पीले (सुनहरे पत्थरों) से जो विशेष रूप से जैसलमेर के पत्थरों से बनाया गया है। इस मन्दिर का विश्राम गृह जोधपुरी पत्थर (चितर पत्थर) से बनाया गया है। मन्दिर में ब्रह्माजी की मूर्ति स्थापित है ,जो संगमरमर की बनाई गई है। इस मन्दिर की स्थापना २० अप्रैल १९६१ में शुरू हुआ था। यहां हर दिन २०० किलोग्राम तक की अनाज पक्षियों को खिलाते हैं। यह भारत का पहला ऐसा ब्रह्मा जी का जिसमें ब्रम्हाजी के साथ माता सावित्री विराजमान है। इस मंदिर का निर्माण राजपुरोहित( जागीरदार) समाज के कुलगुरु श्री श्री 1008 श्री खेताराम जी महाराज (विष्णु अवतार) द्वारा करवाया गया। इसलिए इस पवित्र मंदिर को राजपुरोहित समाज की राजधानी भी कहा जाता है -

बाटाड़ू का कुआँ

संंगमरमर से निर्मित यह कुआँ बायतू तहसील के बाटाड़ू कस्बे में बना हुआ है। कलात्मकता व धार्मिक आस्था का केंद्र यह कुआं ऐतिहासिक धरोहर के रूप में जाना जाता है। राजस्थान के इतिहास में इस कुएं को जलमहल के नाम से जाना जाता है। रियासतकालीन यह कुआं जो बीते कई दशकों से बाटाड़ू एवं आस-पास के गांवों के लिए पीने के पानी का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत रहा है,हालांकि अभी वहां पर केयर्न कंपनी द्वारा पानी को 'RO filtered' करके 'Water ATM' के जरिए भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। लेकिन फिर भी इस कुऐं का महत्व कम नहीं हुआ है,आजकल के युवा इसका महत्व जानकर इस ऐतिहासिक स्थल पर 'सेल्फ़ी क्लिक' करते अमूमन नज़र आ जाते हैंं।

इसलिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है यह कुआं

बाटाडू मुख्यालय पर स्थित यह कुआं 60 फीट लंबा, 35 फीट चौड़ा, 6 फीट ऊंचा व 80 फीट गहरा है। कुएं की उत्तर दिशा में एक बड़ा कुंड बना है, जिसकी गहराई 5 फीट है। इस कुंड के बीच में एक मकराना निर्मित पत्थर के स्टैंड के ऊपर बड़े आकार में संगमरमर की गरुड़ प्रतिमा बनी हुई है,जिस पर भगवान विष्णु अपनी पत्नी लक्ष्मी के साथ विराजित है। जो कुएं का मुख्य आकर्षक है। इस कुएं पर जाने के लिए एक मुख्य द्वार तथा एक निकासी द्वार है। इस दोनों द्वार पर दो सिंह प्रतिमाएं लगी हुई है। इसके चारों ओर श्लोकों के साथ ही कई राजा-महाराजाओं और देवी-देवताओं की कला का वर्णन किया गया है। इसके साथ ही यहां पर संस्कृत में उत्कीर्ण श्लोकों में गाय की महिमा का वर्णन किया हुआ है।

सिणधरी रावल ने करवाया था निर्माण

सन् 1947 के काल में मारवाड़ क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा। उस दौरान यहां के लोग रोजी रोटी की तलाश में बाहर जाने के लिए मजबूर हुए और दूर-दूर तक कहीं पीने का पानी उपलब्ध नहीं था। ऐसी स्थिति को देखते हुए सिणधरी रावल गुलाबसिंह ने इस कुएं का निर्माण करवाया था।

विरात्रा माता का मेला

चोहटन तहसील से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित विरात्रा में मेला आयोजित किया जाता है। यहाँ साल में तीन बार चैत्र, भाद्रपद तथा माघ में वांकल देवी की पूजा का मेला लगता है। विरात्रा माता की मूर्ति की स्थापना वीर विक्रमादित्य ने की थी। वांकल देवी के पुजारी गहेलड़ा परमार जिनको आदर भाव से भोपा भी कहा जाता है , यहां पर देवी की पूजा करते है। गहेलड़ा( भोपा) पांच गाँवो घोनिया , ढोक , सनाउ , जसाई और परो में निवास करते है। इस स्थान पर मूर्ति लाते हुए विक्रमादित्य ने रात्रि विश्राम किया था।

जसोल

एक समय में जसोल मालानी का प्रमुख क्षेत्र था। रावल मल्लीनाथ के नाम पर परगने का नाम मालानी पङा, इस प्राचीन गांव का नाम राठौड़ उपवंश के वंशजों के नाम पर पड़ा। यहां पर स्थित जैन मंदिर और हिंदु मंदिर जसोल के मुख्य आकर्षण हैं। यहां एक चमत्कारिक देवी माता रानी भटीयाणी का मन्दिर है।

वैर माता मंदिर

वैर माता  मंदिर - यह पहाड़ी के पीछे स्थित हिंदू मंदिर है जो मुख्य चोहटन शहर में है। शहर और मंदिर के बीच की दूरी 4 किमी है। इस मंदिर के पास 100 मीटर से अधिक ऊँची रेत के टीले

किराड़ू मन्दिर

"राजस्थान के खजुराहो" धोरों के गढ़ बाड़मेर में किराड़ू का मंदिर वर्तमान हत्मा गांव में जर्जर हालात में उपस्तिथ है। किराड़ू को राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है,दक्षिण भारतीय शैली में बना किराड़ू का मंदिर अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। बाड़मेर से 43 किलोमीटर दूर हात्मा गांव में ये मंदिर है। खंडहरनुमा जर्जर से दिखते पांच मंदिरों की श्रृंखला की कलात्मक बनावट देखने वालों को मोहित कर लेती हैं। कहा जाता है कि 1161 ई. इस स्थान का नाम 'किराट कूप' था। करीब 1000 ई. में यहां पर पांच मंदिरों का निर्माण कराया गया। लेकिन इन मंदिरों का निर्माण किसने कराया, इसके बारे में कोई प

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