डूगरपुर जिले से संबधित समस्त जानकारी का समावेश किया गया है ।
डूंगरपुर जिला दर्शन डूंगरपुर जिले की समस्त जानकारी
- गुहिल वंश के शासक डूंगरसिंह ने 1358 ईस्वी में डूंगरपुर कस्बे के रूप में बसाया ग या था तथा वागड़ राज्य की प्राचीन राजधानी बड़ौदा के स्थान पर डूंगरपुर को बनाया गया
- बांसवाड़ा व डूँगरपुर के मध्य के भू-भाग को मेवल प्रदेश के नाम से भी जाना जाता है।
- : पहाड़ों की नगरी।डूंगरपुर जिले का उपनाम है
- डूंगरपुर का क्षेत्रफल : 3770 वर्ग किलोमीटर।
- नगरीय क्षेत्रफल 31.27 वर्ग किलोमीटर
- ग्रामीण क्षेत्रफल – 3,738.73 वर्ग किलोमीटर
- कुल वन क्षेत्रफल – 646.82 वर्ग किलोमीटर है।
- डूंगरपुर की अक्षांशीय स्थिति : 23 डिग्री 20 मिनट उत्तरी अक्षांश से 24 डिग्री 1 मिनट उत्तरी अक्षांश तक।
- डूंगरपुर की देशांतरीय स्थिति : 73 डिग्री 21 मिनट पूर्वी देशांतर से 74 डिग्री 23 मिनट पूर्वी देशांतर तक।
- डूंगरपुर जिले से होकर माही नदी, सोम नदिया एवं जाखम नदी गुजरती है।
- तहसीलों की संख्या – 3
- उपखण्डों की संख्या – 3
- उपतहसीलों की संख्या – 2
- ग्रामपंचायतों की संख्या – 188
2011 की जनगणना के अनुसार डूंगरपुर जिले के आंकड़ें:-
- कुल जनसंख्या —13,88,552
- पुरुष जनसंख्या —6,96,532
- स्त्री जनसंख्या —6,92,020
- दशकीय वृद्धि दर—25.4%
- साक्षरता दर—59.5%
- पुरुष साक्षरता—72.9%
- महिला साक्षरता—46.2%
- लिंगानुपात—994
- जनसंख्या घनत्व—368
डूंगरपुर जिले के प्रमुख मेले और मंदिर:-
- मुरला गणेश मेला : यह मेला डूंगरपुर में दीपावली की दूज पर भरता है।
- बेणेश्वर मेला : यह मेला डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम में माघ पूर्णिमा को भरता है। इसे
- नाथ संप्रदाय का उर्स : यह डूंगरपुर के गलियाकोट में मोहर्रम 27 को भरता है।
- रथ उत्सव : यह डूंगरपुर पीठ में भाद्रपद माह में भरता है।
- देव सोमनाथ मंदिर—सफेद पत्थरों से निर्मित देव सोमनाथ मंदिर डूँगरपुर में है। इस मंदिर के निर्माण में कहीं भी चूने का प्रयोग नहीं हुआ है केवल पत्थरों से चुनकर बनाया गया है।
- क्षेत्रपाल का मंदिर:- डूँगरपुर के खरदड़ा गाँव में क्षेत्रपाल का प्रसिद्ध मंदिर है।
- संत मावजी का मंदिर:—साबला गांव में, इनको कृष्ण का कलयुगी अवतार माना जाता है, इस मंदिर में ‘निष्कलंक मावजी’ की मूर्ति है। इन्होंने बेणेश्वर धाम की स्थापना की।
- स्थापक का पत्थर मन्दिर:—यहाँ पर पत्थरों की पूजा होती है।
- जैन मन्दिर:—डूँगरपुर के मुख्य बाजार में भगवान आदिनाथ का मन्दिर, नेमीनाथ स्वामी का डंडा मंदिर एवं मामा-भान्जा का मन्दिर है।
डूंगरपुर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल:-
- एक थम्बिया महल—डूँगरपुर में है जिसका निर्माण महारावल शिवसिंह ने 1730 से 1785 ई. के बीच अपनी राजमाता ज्ञान कुँवरी की स्मृति में करवाया।
- बरबूदानियाँ—यहाँ देश का तीसरा एवम् जनजाति क्षेत्रों में देश का प्रथम महिला सहकारी मिनी बैंक स्थापित किया।
- बेणेश्वर मेला—मैडेश्वर, नवाटापुरा, आशपुर तहसील। बेणेश्वर का अर्थ ‘डेल्टा की मल्लिका’। इस मेले को आदिवासियों /भीलों/वागड़ का कुम्भ कहते हैं। यह मेला सोम, माही, जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर भरता है। इस मेले में आदिवासी (भील) अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करते है।
- सैय्यद फखरुद्दीन की दरगाह— यह दरगाह गलिया कोट, डूँगरपुर में माही नदी के किनारे स्थित हैं। यह दरगाह ”दाउदी बोहरा” सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहाँ मोहर्रम के 27 वें दिन उर्स भरता है।
- अन्य दर्शनीय स्थल:- संत मावजी का मंदिर, साबला देव सोमनाथ का मंदिर विजय राजेश्वर मंदिर गवरी बाई का मंदिर बेणेश्वर धाम (बागड़ का पुष्कर एवं वागड़ का कुंभ ) गलियाकोट एक थंबा महल सैयद फखरुद्दीन की दरगाह गैप सागर झील नानाभाई खाट एवं कालीबाई उद्यान बादल महल जूना महल।
डूंगरपुर जिले के प्रश्न:-
- डूंगरपुर में लोहा उत्पादक क्षेत्र कौन सा है – तलवाड़ा
- डूंगरपुर में पारेवा पत्थर निकलता है। पारेवा पत्थर के लिए डूंगरपुर प्रसिद्ध है।
- डूंगरपुर में हरा ग्रेनाइट उत्पादक क्षेत्र कौन सा है – डूंगरपुर
- धनमाता व कालीमाता का मन्दिर-डूँगरपुर में है।
- डूंगरपुर में संगमरमर उत्पादक क्षेत्र कौन सा है – नवागांव
- वनों को बढ़ावा देने के लिए 1986 में राजीव गाँधी ने रूख भायला कार्यक्रम की शुरूआत डूँगरपुर से की। रूख भायला का अर्थ-वृक्ष मित्र होता है।
- डूंगरपुर में फ्लोराइड उत्पादन क्षेत्र कौन सा है – मांडो की पाल
- बरबूदानियाँ—यहाँ देश का तीसरा एवम् जनजाति क्षेत्रों में देश का प्रथम महिला सहकारी मिनी बैंक स्थापित किया।
- डूंगरपुर में सीसा-जस्ता उत्पादक क्षेत्र कौन से हैं – घुँघराव मांडो
- भारत सरकार ने सर्वें में 150 पिछड़े जिलों की पहचान की गई, जिसमें डूँगरपुर भी शामिल है।
- गैबसागर झील का निर्माण किसने करवाया – गोपीनाथ ने।
- रमकड़ा उद्योग – गलियाकोट, डूँगरपुर में स्थित इन उद्योगों में सोप स्टोeन के कलात्म”क खिलौनों का निर्माण किया जाता है।
- उदय विलास महल कहां स्थित है – डूंगरपुर में।
- महुआ का पेड़ – आदिवासियों के लिए वरदान है, इस पेड़ से महुड़ी शराब बनाते हैं।
- एकमात्र बेणेश्वर महादेव का मंदिर जहां खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है कहां स्थित है – डूंगरपुर में।
- डूँगरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में राज्य में पहली बार ‘ड्रेस कोड’ शुरू किया गया है।
- राजस्थान में सर्वाधिक अनुकूल लिंगानुपात किस जिले का है – डूंगरपुर जिले का।
- राजस्थान में अनुसूचित जाति का न्यूनतम अनुपात किस जिले में है – डूंगरपुर जिले में।
- राज्य सरकार ने कालीबाई के सम्मान में काली बाई महिला साक्षरता उन्नयन पुरस्कार चालू कर रखा है।
- राजस्थान का न्यूनतम तापांतर वाला जिला कौन सा है – डूंगरपुर जिला।
- राजस्थान निर्माण के समय यह राजस्थान का सबसे-छोटा जिला था।
- राजस्थान में अनुसूचित जाति की न्यूनतम जनसंख्या किस जिले में है – डूंगरपुर जिले में।
- वागड़ की राजधानी-बड़ौदा (प्राचीन काल)। बड़ौदा गांव में सम्वत् 1349 का महाराजा वीरसिंह देव के समय का एक शिलालेख लगा हुआ है।
- देश एवं राजस्थान का प्रथम पूर्ण साक्षर आदिवासी जिला कौन सा है – डूंगरपुर जिला।
- डूँगरपुर को राष्ट्रीय बागवानी मिशन में शामिल किया गया है।
- डूंगरपुर प्रजामंडल की स्थापना किसने की – बागड़ के गांधी भोगीलाल पंड्या ने 1944 ईस्वी में की थी।
- देश का प्रथम आदिवासी महिला सहकारी निजी बैंक कहां स्थित है – बरबूँदनिया गांव डूंगरपुर जिले में।


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