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बूंदी जिला दर्शन bundi jila darshan bundi district knowledge

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                     बूंदी जिला दर्शन

राजस्थान की बूंदी जिले के बारे में समस्त जानकारी उसकी भौगोलिक आर्थिक सामाजिक और धार्मिक पक्षों का संपूर्ण समावेश


बूंदी जिला सामान्य परिचय:-

 बूंदी जिले के उपनाम/प्राचीन नाम:  छोटीकाशी बावडियों का शहर, द्वितीय काशी, वृन्दावती, राजस्थान की काशी, बुंदू का नाला आदि उपनाम से जाना जाता है हाड़ा चौहान के प्रभुत्व के कारण इस प्रदेश को हाड़ोती प्रदेश भी कहा जाता है
बूंदी जिले का नाम बूंदी  के मीणा शासक बूंदा के नाम पर पड़ा था।बूँदी के शासक बुद्ध सिंह की रानी आनन्द कुंवरी ने मराठों को राजस्थान में आने का पहली बार निमन्त्रण दिया था।

बूंदी की स्थापना:– 
                             लोगो की मान्यता  के अनुसार बूँदी की स्थापना ‘बूंदा मीणा’ की  सन् 1342 में देवा ने बूँदी में चौहान वंश की स्थापना की।
  1. बूंदी जिले का क्षेत्रफल 5776 वर्ग किलोमीटर है
  2. नगरीय क्षेत्रफल – 176.83 वर्गकिलोमीटर
  3. ग्रामीण क्षेत्रफल – 5599.17 वर्गकिलोमीटर
  4. बूंदी जिले 5 तहसील है
  5.  में कुल वनीय क्षेत्रफल  1495.65 वर्गकिलोमीटर
  6. बूंदी में : 7 पंचायत समितिया है
  7. बूंदी जिले में 3 विधानसभा क्षेत्र है
  8. बूंदी जिले में 5 उपखंड है
 
बूंदी जिले का अक्षांशीय  स्थिति :
                                       24 डिग्री 54 मिनट उत्तरी अक्षांश से 25 डिग्री 53 मिनट उत्तरी अक्षांश तक।
बूंदी की देशांतरीय स्थिति :
                                75 डिग्री 19 मिनट पूर्वी देशांतर से 76 डिग्री 19 मिनट 30 सेकंड पूर्वी देशांतर तक।

जनगणना 2011 के अनुसार बूंदी जिला 

  1.  जनसंख्या—11,10,906
  2. पुरुष जनसंख्या —5,77,160
  3. महिला जनसंख्या —5,33,746
  4. दशकीय जनसंख्या  वृद्धि दर—15.4%
  5. जनसंख्या घनत्व—192
  6. लिंगानुपात—925 
  7. साक्षरता दर—61.5% 
  8. पुरुष साक्षरता—75.4%
  9. महिला साक्षरता—46.6%
  10. बूंदी जिले का शुभंकर सुर्खाब है
  11. बूंदी जिले का परिवहन कोड RJ 08 है

बूंदी का इतिहास 

                   बूंदी की स्थापना सन् 1242 ई. में राव देवाजी ने की थी। यहाँ के शासक राव सुर्जन हाड़ा ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी। शाहजहाँ के समय बूँदी के शासक छत्रसाल हाड़ा ने दारा की ओर से धरमत की लड़ाई में भाग लिया था, किंतु वह इस युद्ध में मारा गया। बूँदी अपनी विशिष्ट चित्रकला शैली के लिए विख्यात है, जो इस अंचल में मध्यकाल में विकसित हुई। बूँदी चित्रकला के विषयों में शिकार, सवारी, रामलीला, स्नानरत नायिका, विचरण करते हाथी, शेर, हिरण, गगनचारी पक्षी, पेड़ों पर फुदकते शाखामृग आदि रहे हैं।  हाडाशा राव देवा ने बूँदा को हराकर बूँदी पर अपना कब्ज़ा कर लिया फिर इसे अपनी राजधानी बनाया। सन 1947 में भारत के स्वतंत्र होने तक बूँदी एक स्वतंत्र रियासत के रूप में कायम रहा।

बूंदी की नदियाँ  एवं जल स्रोत

  • घोड़ा-पछाड़ नदी- यह नदी बूंदी की एक प्रमुख नदी है  
  • बूंदी में बहने वाली अन्य नदियां
  • चम्बल, मांगली, मेज, कुराल, तालेड़ा आदि।
  • नवलसागर झील या नौलखा झील उम्मेद सिंह द्वारा निर्मित। कनकसागर झील - इसे दुगारी झील भी कहते हैं।ग
  • गरदड़ासिंचाई परियोजना-होसलपुर गाँव के नजदीक स्थित है।
  • गुढ़ा सिंचाई परियोजना—मेज नदी पर।
  • चाकण बाँध—गुढ़ा गाँव में मिट्टी से निर्मित बाँध।
  • अन्य स्रोत,  जैतसागर, इन्द्राणी, भीमतल, फूलसागर, गुढ़ा बांध, हिण्डोवली, गंगासागर, नमाना, चांदोलिया, अभयपुरा, पेच की बावड़ी तथा बरधा डेम आदि है।




बूंदी जिले के दर्शनीय तारागढ़ का किला – Bundi Me darshaniye sthal Taragarh kila In Hindi


तारागढ़ का किला वर्ष 1354 में निर्मित है जो भारत के उत्तरी राज्य राजस्थान के अजमेर शहर में सबसे प्रभावशाली संरचनाओं में से एक है। बता दें कि बूंदी राज्य की स्थापना इसी वर्ष राव देव द्वारा की गई थी, और दौरान इस विशाल किले का निर्माण भी किया गया था। तारागढ़ किले को स्टार फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है।
अरावली पर्वतमाला के नाग पहाड़ी पर स्थित यह किला बूंदी शहर के मनोरम और मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है। जो भी पर्यटक इस किले को देखता है तो वो इस की विशेषताओं की सराहना करता है। जो आज भी राजपूत शासन की भव्यता को प्रदर्शित करती हैं।


बूंदी का मोती महल – Bundi Ka  Moti Mahal In Hindi



मोती महल बूंदी का एक ऐतिहासिक स्थल है जो अपनी सुंदरता के साथ पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है। नागल सागर झील के दृश्य के साथ पर्यटक अरावली पहाड़ियों के मनोरम दृश्य का आनंद भी ले सकते हैं। मोती महल का निर्माण महाराजा राजा भाओ सिंह जी ने वर्ष 1645 में करवाया था। 16 वीं और 17 वीं शताब्दी के बाद के वर्षों में इस किले को राव राजा चतरसाल और फिर राव राजा उम्मेद सिंह ने अपने अधिकार में ले लिया था। इन दोनों राजाओं द्वारा किले को और भी मजबूत किया गया। उन्होंने यहां स्टेप वेल्स का निर्माण भी किया गया और किले में कई संरचनाएं भी जोड़ी। बाद में, 19 वीं सदी में इस किले पर अजीत सिंह ने कब्जा कर लिया। उन्होंने झील के किनारे एक सुंदर उद्यान और किले के पास एक विशाल शिव मंदिर का निर्माण किया।


बूंदी में बादल महल – Bundi Mein  Badal Mahal In Hindi



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  •  राजस्थान के जिले -

बादल महल बूंदी में स्थित तारागढ़ किले के परिसर में स्थित है।  इस आकर्षक महल की दीवारें उत्कृष्ट चित्रों से सजी हुई हैं।  यहां बनी पेंटिंग्स सच में देखने लायक है जो चीनी संस्कृति के प्रभाव को दर्शाते हैं।


 बूंदी का गढ़ पैलेस – Bundi Ka  Gadh Palace In Hind


गढ़ पैलेस महल में कई राजमहल हैं, जो केंद्रीय राजसी निवास को घेरते हैं। शहर के विभिन्न शासकों ने इन छोटे महलों का निर्माण किया। इन महल में कई किस्से और कहानियां जुड़ी हुई हैं।


बूंदी जिले का दर्शनीय स्थल हाथी पोल – Bundi Ka darshniye Sthal Hathi Pol In Hindi


हाथी पोल बूंदी के गढ़ पैलेस में एक प्रवेश द्वार है।  महल में खड़ी चढ़ाई के अंत में दो विशाल द्वार देख सकते हैं। इस विशाल द्वार को हाथी पोल कहते हैं। हाथी पोल में दो तुरही वाले हाथी होते हैं जो एक चाप बनाते हैं। हाथी पोल का निर्माण राव रतन सिंह द्वारा किया गया था।


बूंदी के दर्शनीय स्थल सुख महल – Bundi Ke Darshaniya Sthal Sukh Mahal In Hindi


सुख महल बूंदी का प्रमुख दर्शनीय स्थल है जो जैतसिंह झील के बीच स्थित है। इस महल का निर्माण उम्मेद सिंह के शासन के दौरान किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि ओल्ड पैलेस और सुख महल एक भूमिगत सुरंग के माध्यम से जुड़े हुए हैं। सुख महल का मुख्य आकर्षण एक सफेद संगमरमर की छतरी है। यह आकर्षक छतरी सुख महल की दूसरी मंजिल की छत पर है। सुख महल के निर्माण का उस समय के राजकुमारों के लिए उनकी नापाक गतिविधियों से स्वतंत्र होने का प्रावधान करना था।


बूंदी शहर का पर्यटन स्थल चौरासी खंभों की छत्री – Bundi shahar ka paraytan sthal Chaurasi Khambon Ki Chhatri In Hindi


चौरासी खंभों की छत्री बूंदी का एक ऐतिहासिक स्थल है जो इतिहास में रूचि रखने वाले लोगों के आदर्श जगह है। यह एक बरामदा है जो 84 खंभों के सपोर्ट पर स्थित है। इस बरामदा का निर्माण देवसेना की सेवाओं का सम्मान करने के लिए राव अनिरुद्ध सिंह द्वारा 1683 में किया गया था, जो एक नर्स थी। आपको बता दें कि यह दो मंजिला एक स्मारक है जो पूजा स्थल के रूप में भी काम करता है।


 बूंदी के पर्यटन स्थल भूराजी-का-कुंड – Bundi Ke Paryatan Sthal Bhoraji-Ka-Kund In Hindi


भूराजी-का-कुंड बूंदी की एक ऐसी जगह है  भूराजी-का-कुंड देखने में बेहद सुंदर है जो 16 वीं शताब्दी में निर्मित है। आपको बता दें कि भूराजी-का-कुंड जैसे जल निकायों का निर्माण बूंदी के सूखे प्रभावित क्षेत्रों के लिए पानी के स्रोत के रूप में किया गया था

बूंदी  की  नवल सागर झील – Bundi ki  Nawal Sagar jhil In Hindi


नवल सागर झील एक विशाल मानव निर्मित झील है जिसे तारागढ़ में है। इस झील में कुछ छोटे द्वीप भी हैं। यह झील शहर के बीच में स्थित है इसलिए कोई भी इस झील में शहर का प्रतिबिंब देख सकता है। पूरे बूंदी शहर की दर्पण इमेज जब झील के निर्मल जल पर पड़ती है तो यह पर्यटकों को बेहद आकर्षक करती है। बूंदी की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए नवल सागर झील एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।


बूंदी के आकर्षक स्थल फूल महल – Bundi Ke Aakarshak Sthal Phool Mahal In Hindi


फूल महल एक विशाल किला है जो एक झील के किनारे स्थित है जिसे फूल सागर झील कहा जाता है। यह फूल महल का निर्माण वर्ष 1945 में महाराजा बहादुर सिंह द्वारा शुरू किया गया था। अगर आप बूंदी की यात्रा करने जा रहें हैं


बूंदी के दर्शनीय स्थल शिक बुर्ज – Bundi Ke Darshaniya Sthal Shikar Burj In Hindi


शिक बुर्ज बूंदी शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो सुख महल से थोड़ी दूरी पर स्थित है। शिक बुर्ज वास्तव में बूंदी के शासकों के स्वामित्व वाली एक पुरानी शिकार की जगह है। यह हंटिंग लॉज बूंदी शहर में घने जंगलों में स्थित है।

 बूंदी जिले के पर्यटन स्थल रानीजी की बावड़ी – Bundi Ke Paryatan Sthal Raniji Ki bavdi Step Wells In Hindi




स्टेप वेल्स बूंदी शहर की एक ट्रेडमार्क विशेषता हैं। स्टेप वेल्स का निर्माण अकाल ग्रस्त शहर को पानी उपलब्ध कराने के साधन के रूप में किया गया था। स्टेप वेल्स को स्थानीय बोली में बाउरी, वाव, कुंड या सागर भी कहा जाता है। ये स्टेप वेल्स विभिन्न आकृतियों के हैं और इनका इस्तेमाल पानी को इकट्ठा करने के लिए किया जाता है। आपको बता दें कि बूंदी में कुल 50 पुराने कुएँ और टैंक हैं।


बूंदी  के अभयारण्य:-

  1.   दुगारी पक्षी अभयारण्य:— कनक सागर पक्षी अभयारण्य की घोषणा वन्य जीव विभाग द्वारा 1987 में की गई थी। लगभग 72 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें हंस, सारस, जलमुर्गी, स्नेयक बर्ड, गैरेट आदि है।
  2. रामगढ़ विषधारी अभयारण:— यह साँपों की शरणस्थली के नाम से भी जाना जाता है। बूंदी जिले में यह अभयारण्य 307 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत अरावली की पहाड़ि‍यों में स्थित है। इसमें बाघ, नीलगाय, हिरण, बघेरा, जंगली मुर्गे, रीछ, जंगली कुत्ते तथा 500 प्रकार के अन्य जीव पाये जाते हैं।


बूंदी जिले के अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न:-

  • बूँदी चित्रशैली:- भित्ति चित्रों का स्वर्ग कहलाती है। बूंदी चित्रशैली का प्रारम्भत सुर्जन सिंह हाड़ा से माना जाता है। बूंदी शैली में सर्वाधिक पशु-पक्षियों का चित्रण हुआ, इसलिए इसे पक्षी शैली भी कहते हैं। वर्षा में नाचता हुआ मोर इस शैली की प्रमुख विशेषता है। इस शैली में चित्र बनाने के लिए उम्मेद सिंह ने बूंदी में चित्रशाला की स्थापना की थी। बूंदी चित्रकला शैली के प्रमुख चित्रकार – सुरजन, अहमद अली, रामलाल इत्यादि थे।
  • बूंदी चित्र शैली का स्वर्ण काल किस शासक के काल को कहा जाता है – राव सुरजन सिंह हाडा के शासनकाल को।
  • राजस्थान राज्य की एकमात्र सहकारी चीनी मिल- सहकारी शुगर मिल्स लिमिटेड-केशवरायपाटन बूँदी में 1965 में स्थापित हुई।
  • अनारकली की बावड़ी कहां स्थित है – बूंदी जिले में।
  • देश की प्रथम बर्ड राइडर रॉक पैटिंग गरदड़ा गाँव में छाजा नदी (गरड़दा) के किनारे प्राप्त हुई।
  • कजली तीज बूँदी की प्रसिद्ध है। भादों (भाद्रपद) माह में तीज तिथि को आयोजित इस मेले में गौरी माता की सवारी पूरे लवाजमे के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती है।
  • संतूरमाता सिंचाई परियोजना किस जिले में स्थित है – बूंदी जिले में।
  • बूंदी प्रजामंडल की स्थापना किसने की – कांतिलाल एवं नित्यानंद ने 1931 ईस्वी में की।
  • चाकन सिंचाई परियोजना किस जिले में स्थित है – बूंदी जिले में।
  • वंश भास्कर-इसके अधूरे छोड़े गये कार्य को मुरारीदीन ने पूरा किया था।
  • पशु पक्षियों की शैली किस चित्र शैली को कहा जाता है – बूंदी शैली को।
  • राज्य का प्रथम सीमेंट कारखाना-ACC सीमेंट उद्योग, लाखेरी, स्थापना-1912-13. स्थापनाकर्ता-क्लिक निक्सन कम्पनी।
  • बूंदी रियासत के रियासत कालीन सिक्के कौन से हैं – रामशाही, चेहरेशाही, कटारशाही, ग्यारहसना सिक्के आदि।
  • रणथंबोर के बागों का जच्चा घर किस अभयारण्य को कहा जाता है – रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य को
  • सती प्रथा पर पहली बार रोक किस रियासत ने लगाई – बूंदी रियासत ने 1822 ईसवी में।
  • भित्ति चित्रों का स्वर्ग किस चित्र शैली को कहा जाता है – बूंदी चित्र शैली को।
  • प्रतिवर्ष 24 जून को बूँदी महोत्सव मनाया जाता है।
  • प्रसिद्ध लोकदेवता वीर तेजाजी की कर्मस्थली-बाँसी दुगारी है।
  • मोर के साथ सांप का एकमात्र चित्रण किस चित्र शैली में मिलता है – बूंदी चित्र शैली में।
  • सती प्रथा पर पहली बार रोक 1822 ई. में बूँदी रियासत ने लगाई।
  • सांपों की शरण स्थली किस अभयारण्य को कहा जाता है – रामगढ़ विषधारी वन्य जीव अभ्यारण्य को।
  • रेल बाबा के नाम से प्रसिद्ध किशन लाल सोनी का संबंध किस जिले से हैं – बूंदी जिले से।
  • राजस्थान का प्रथम साहित्यिक पत्र-सर्वहित के संपादक मेहता लज्जाराम बूँदी के निवासी है।
  • भीमताल जलप्रपात किस नदी पर बना हुआ है – मांगली नदी पर बूंदी में।
  • शेख अब्दुल अजीज मक्की की दरगाह किस जिले में स्थित है – बूंदी जिले में।
  • बूंदी जिले की प्रमुख नदियां कौन सी है – मेज नदी, चंबल नदी, मांगली नदी, तालेड़ा नदी, कुराल नदी, घोड़ा पछाड़ नदी आदि।
  • राजस्थान का प्रथम सीमेंट का कारखाना कहां स्थापित है – लाखेरी, बूंदी में।
  • दुगारी पक्षी अभयारण्य किस अभयारण्य को कहा जाता है – कनक सागर पक्षी अभयारण्य को।
  • कंजरों की आराध्य देवी रक्तदंजी माता-संतूर, बूँदी।
  • राजस्थान का प्रथम साहित्यिक पत्र-सर्वहित के संपादक मेहता लज्जाराम बूँदी के निवासी है।
  • भीमताल जल प्रपात माँगली नदी पर बूँदी में है।
  • बूंदी जिले की मीठे पानी की झील कौन सी है : – जय सागर, कनकसागर, नवलसागर, रामसागर झील आदि।
  • कजली तीज महोत्सव किस जिले में आयोजित होता है – बूंदी जिले में अगस्त माह में आयोजित होता है।
  • राजस्थान का सबसे छोटा आखेट निषिद्ध क्षेत्र कौन सा है – कनक सागर पक्षी अभयारण्य।

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